नोएडा, 18 जुलाई 2026 | रिपोर्ट: सिमरन सिंह
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे मुआवजे के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने कहा कि टिकट न मिलने के कारण रेलवे दुर्घटना के शिकार परिवार को मुआवजे से नहीं रोका जा सकता।
रेलवे मुआवजा पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
रेलवे मुआवजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि रेलवे दुर्घटना में मृतक के पास टिकट नहीं होने के कारण उसे वास्तविक यात्री मानने से मना नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि रेलवे अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए इसे उदार और उद्देश्यपूर्ण तरीके से समझा जाना चाहिए। कोर्ट ने 2015 के एक मामले में मृतक की पत्नी को चार सप्ताह के भीतर 8 लाख रुपये मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया।
रेलवे मुआवजा पर ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे दावा ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसमें टिकट ना मिलने के कारण मुआवजे का दावा अस्वीकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवार के हलफनामे और अन्य परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि रेलवे की टिकट जांच प्रक्रिया का सही ढंग से पालन होता, तो यात्री का टिकट रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकता था।
रेलवे मुआवजा के साथ रेलवे को सुझाव
रेलवे मुआवजे के मामलों में फैसला देते हुए अदालत ने रेलवे मैनुअल में “सेकेंड क्लास पैसेंजर” शब्द पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि ‘सेकेंड क्लास’ शब्द केवल ट्रेन के कोच के संदर्भ में उपयोग होना चाहिए, यात्रियों के संदर्भ में नहीं। अदालत ने यात्रियों की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और रेलवे में अधिक स्टाफ की नियुक्ति जैसे सुधारों पर भी ध्यान दिया।
