नोएडा, 31 जुलाई 2026 | रिपोर्ट: मुस्कान शाह
दिल्ली सरकार राजधानी की सभी संपत्तियों के लिए दिल्ली प्रॉपर्टी आधार कार्ड सिस्टम लागू करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक 2026 के तहत गांवों, फ्लैटों, व्यावसायिक भवनों और अन्य संपत्तियों का डिजिटल सर्वेक्षण कर उन्हें एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी प्रदान करने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य संपत्ति रिकॉर्ड को एकीकृत और अधिक स्पष्ट बनाना है।
दिल्ली प्रॉपर्टी आधार कार्ड से क्या बदलेगा?
सरकार के मुताबिक, ड्रोन सर्वेक्षण और उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकी के जरिए संपत्तियों की सीमाओं का डाटा संग्रहित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल होंगे। बहुमंजिला संरचनाओं में प्रत्येक मंजिल के लिए अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे हर यूनिट की विशिष्ट पहचान सुनिश्चित हो सके। इस कार्य में Survey of India तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
दिल्ली प्रॉपर्टी आधार कार्ड का पहला चरण
योजना की शुरुआत दिल्ली के 30 ग्रामीण गांवों से की जा रही है, जहां केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। अब संबंधित दस्तावेजों की तैयारी की जा रही है और संपत्ति कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार इस पायलट परियोजना के अनुभव के आधार पर पूरे दिल्ली में व्यवस्था लागू करने की योजना बना रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड से क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से संपत्ति स्वामित्व, उत्तराधिकार, खरीद-बिक्री, बैंक ऋण, भवन नक्शा स्वीकृति और कानूनी विवादों के निपटारे में सरलता आएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार यह प्रणाली संपत्तियों को उचित डिजिटल पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। हालाँकि, प्रस्तावित प्रॉपर्टी आधार कार्ड स्वामित्व का अंतिम प्रमाण होगा या केवल पहचान रिकॉर्ड, इस पर अंतिम निर्णय विधेयक स्वीकृत होने के बाद स्पष्ट होगा।
