नोएडा, 2 अगस्त 2026 | रिपोर्ट: मुस्कान शाह
कुलगाम में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो युवा श्रमिकों की मृत्यु ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने की कोशिश में जम्मू-कश्मीर गए ये श्रमिक दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में एक ईंट-भट्ठे पर कार्यरत थे। शुक्रवार रात आतंकियों ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे दोनों तुरंत ही मर गए। यह घटना उनके परिजनों के लिए अत्यंत दुखदायी साबित हुई है।
कुलगाम आतंकी हमला: दीपक रात्रे के परिवार पर टूटा संकट
सक्ती जिले के बुंदेली गांव के 24 वर्षीय दीपक रात्रे अपने परिवार के एकमात्र आय उत्पन्न करने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में वृद्ध मां, शारीरिक रूप से दिव्यांग छोटा भाई, पत्नी और चार महीने का बेटा है। करीब सात-आठ महीने पहले वे अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर में रोजगार की खोज में गए थे। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। अब उनके निधन के बाद परिवार के सामने जीविका का एक बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। जिला प्रशासन उनके शव को गांव लाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।
कुलगाम आतंकी हमला: भूपेंद्र भैना का सपना भी अधूरा रह गया
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुहिया गांव के 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना लगभग तीन महीने पहले अपनी पत्नी के साथ ईंट-भट्ठे में काम करने जम्मू-कश्मीर गए थे। उन्होंने अपने चार साल के बेटे को दादी और छोटी बहन के देखरेख में छोड़ दिया था, जबकि उनके माता-पिता और भाई हिमाचल प्रदेश में काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने देर रात परिवार तक यह दुखद सूचना पहुंचाई। स्थानीय प्रशासन और जम्मू-कश्मीर प्रशासन उनके पार्थिव शरीर को गृह जिले लाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
सरकार ने जताया शोक
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आतंकी घटना पर गहरा अफसोस जताया। उन्होंने इसे आतंकियों की निर्लज्ज क्रिया करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ दृढ़ता से खड़ी है। अधिकारियों को सभी संभव मदद प्रदान करने के आदेश दिए गए हैं ताकि दोनों परिवारों को जरूरी सहायता मिल सके।
