नोएडा, 22 अप्रैल 2026 | रिपोर्ट: सिमरन सिंह
पहलगाम हमले की बरसी पर एक वर्ष पूर्व हुए आतंकवादी हमले की भयावह यादें पुनः जागृत हो गई हैं। इस हमले में 26 निर्दोष व्यक्तियों की हत्या हुई थी, जिसने सम्पूर्ण देश को हिलाकर रख दिया था। एक साल बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार इस आघात से बाहर नहीं निकल पाए हैं, विशेषकर गुजरात के भावनगर का एक परिवार आज भी गहरे निराशा में फंसा हुआ है।
पिता-पुत्र को खोकर बिखरा परिवार, एक साल बाद भी नहीं भरा दर्द
जानकारी के मुताबिक, भावनगर के यतीश परमार और उनके बेटे स्मित परमार इस हमले के दौरान मारे गए। परिवार धार्मिक यात्रा पर जम्मू-कश्मीर आया था और पहलगाम की सैर करते समय अचानक हुई गोलीबारी में दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डाल दिया, जबकि अन्य सदस्य भी घायल हुए थे।
पहलगाम हमला बरसी: पत्नी अब भी मानसिक सदमे में
पहलगाम हमले के एक वर्ष बाद भी मृतक की पत्नी काजलबेन इस घटना से नहीं उबर पाई हैं। परिजनों के अनुसार, वह अभी भी मानसिक तनाव से ग्रस्त हैं और कई बार उपचार की आवश्यकता होती है। परिवार के लिए यह साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जहां हर दिन उस दुखद घटना की यादें ताज़ा बनी रहीं।
न्याय की आस और शांति की उम्मीद, परिवार की नजरें अब भी टिकीं
परिवार का कहना है कि सरकारी सहायता मिली, फिर भी अपने प्रियजनों की कमी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने हमले में जिन लोगों की जान गई, उन्हें श्रद्धांजलि दी और ऐसी घटनाएं फिर से न हों, इसकी कामना की। यह बरसी एक बार फिर देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने का संदेश देती है।
