नोएडा, 18 जून 2026 | रिपोर्ट: सिमरन सिंह
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के मुधारा में जल संकट हाल ही में चर्चा का कारण बन गया है। गांववासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की पेयजल परियोजना के तहत पाइपलाइन और पानी की टंकी तो स्थापित की गई, लेकिन अब तक घरों के नलों में पानी नहीं आया। लगभग 2 हजार की जनसंख्या वाला यह गांव अभी भी हैंडपंप और कुओं पर निर्भर है।
मुधारा जल संकट का असर
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पीने के पानी की गंभीर कमी है। महिलाएं और बच्चे प्रतिदिन घंटों पानी भरने में लगाते हैं। कई बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें स्कूल से पहले और बाद में पानी लाने में मदद करनी पड़ती है। गांव में पानी की समस्या अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
मुधारा जल संकट और रुकी शादियां
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगभग 40 युवक विवाह की उम्र के हैं, लेकिन पानी की कमी के चलते विवाह नहीं हो पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब संभावित रिश्तेदार गांव की स्थिति देखते हैं तो वे अपनी बेटियों का विवाह यहां करने से मना कर देते हैं। पानी की कमी अब एक सामाजिक समस्या बन गई है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
गांव वालों का कहना है कि चुनाव के समय पानी की समस्या हल करने के बहुत से वादे हुए थे, लेकिन स्थिति आज भी वही है। दस्तावेजों में पाइपलाइन, टंकी और नल दिखते हैं, जबकि असली स्थिति में लोग अभी भी पानी के लिए कतार में नजर आते हैं। ग्रामीणों ने त्वरित स्थायी समाधान की मांग की है।
