जंतर मंतर विवाद पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतीकात्मक तस्वीर

जंतर मंतर विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अनुचित नारे लगाए गए, जिससे उन्हें दुख हुआ। फिर भी उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को सख्त सजा देने के बजाय उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे संबंधित छात्रों को माफ करना चाहते हैं और समाज को भी उनके इस निर्णय को मान्यता देनी चाहिए।

जंतर मंतर विवाद: सजा नहीं, सीख देने की अपील

प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि युवा कभी-कभी भावनाओं में आकर गलत फैसले कर लेते हैं, मगर उन्हें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गलती से दांत जीभ को काट लेते हैं, तब भी कोई अपने दांत नहीं तोड़ता क्योंकि दोनों अपने हैं। इसी प्रकार समाज का कर्तव्य है कि वह भटके हुए युवाओं को स्वीकार करे और उनका मार्गदर्शन करे, न कि उन्हें सामाजिक या कानूनी रूप से लंबे समय तक परेशान करे।

जंतर मंतर विवाद: जीरो एफआईआर और जांच

इस मामले में एक महिला के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के सिलसिले में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में यह दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ असभ्य भाषा का प्रयोग किया गया। मामला भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दर्ज कर संसद मार्ग थाने को जांच के लिए सौंप दिया गया है। पुलिस अब उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

जंतर मंतर विवाद: देश निर्माण का दिया संदेश

प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने और देश के विकास में योगदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और युवाओं को भी अपने सपनों को पूरा करते हुए देश के निर्माण में भाग लेना चाहिए। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर चला आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता के आश्वासनों के बाद खत्म हुआ था।