नोएडा, 6 अगस्त 2026 | रिपोर्ट: मुस्कान शाह
रांची छात्र आंदोलन अब झारखंड में भर्ती और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग के लिए एक विशाल आंदोलन बन चुका है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र नेता और नौकरी के लिए अभ्यर्थी देवेंद्र नाथ महतो सहित अनेक युवा धरने पर बैठे हुए हैं। कई प्रदर्शनकारी अनशन पर हैं और उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
रामगढ़ के निवासी ब्रह्मानंद कुमार महतो पिछले चार दिनों से अनशन पर हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ऐसा कोई आंदोलन नहीं किया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में कथित विसंगतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाना आवश्यक हो गया है। प्रदर्शनकारी JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और JSSC सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में आरोपित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
रांची छात्र आंदोलन में बढ़ता जनसमर्थन
यह आंदोलन पहले 25 जून को रांची के बापू वाटिका से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें सैकड़ों छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक समूह शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षाओं में प्रश्न पत्रों के लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। लगभग 3.5 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी, जिससे चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। राज्य सरकार ने मामले में कदम उठाते हुए कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है।
रांची छात्र आंदोलन पर सरकार का रुख
झारखंड सरकार ने विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि जांच एजेंसियाँ लगातार कार्यरत हैं और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने छात्रों से संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का यकीन दिलाया है।
प्रदर्शन स्थल पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और छात्र प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग की है।
प्रदर्शन में भाग लेने वाले कई प्रतिभागियों का कहना है कि उन्होंने सालों तक तैयारी की, परीक्षाएं पास कीं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी न होने से उनका भविष्य अनिश्चित है। छात्रों का कहना है कि यह केवल नौकरी की चाहत नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रणाली के लिए संघर्ष है।
