सेक्टर-105 में पुराने मकानों के मालिकों को भेजे जा रहे भारी-भरकम निर्माण उपकर यानी लेबर सेस के नोटिसों को लेकर निवासियों में नाराजगी है। RWA का आरोप है कि कुछ मामलों में मकानों की निर्माण लागत वास्तविक खर्च से कई गुना अधिक दर्शाई गई है। ब्याज और पेनल्टी जुड़ने से नोटिस की रकम और बढ़ गई है। RWA अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है।

नोएडा लेबर सेस के आकलन पर सवाल

RWA के अनुसार, वर्ष 2017-18 के कथित GIS सैटेलाइट सर्वे के आधार पर निर्माण लागत का आकलन किया गया। संगठन का कहना है कि वास्तविक निर्माण, दस्तावेज और उस समय की लागत की पर्याप्त जांच नहीं हुई। RWA ने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ मकानों पर वास्तविक खर्च करीब 4-5 लाख रुपये था, जबकि विभागीय आकलन में लागत 11 लाख रुपये या उससे अधिक दर्शाई गई।

नोएडा लेबर सेस पर ब्याज-पेनल्टी का मुद्दा

RWA ने वर्षों पुराने निर्माण के 10 से 15 साल बाद नोटिस जारी किए जाने पर भी सवाल उठाया है। संगठन के मुताबिक, कुछ मामलों में ब्याज के साथ 100 प्रतिशत तक पेनल्टी जोड़े जाने से नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। नए खरीदारों को पुराने निर्माण से जुड़ी कथित देनदारी के नोटिस मिलने पर भी RWA ने स्पष्ट कानूनी और दस्तावेजी आधार की मांग की है।

नोएडा लेबर सेस की निष्पक्ष जांच की मांग

RWA ने मुख्यमंत्री से पुराने नोटिसों की समीक्षा, सैटेलाइट आधारित मूल्यांकन की जांच और नागरिकों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण से लीज डीड, CC और आवश्यक NOC प्राप्त पुराने निर्माणों की अलग से समीक्षा होनी चाहिए। RWA पारदर्शी प्रक्रिया, सही मूल्यांकन और उचित सुनवाई के बाद ही देनदारी तय किए जाने की मांग कर रही है।