नोएडा, 18 सितम्बर 2026 | रिपोर्ट: अपेक्षा चौधरी
त्योहारी सीजन से पहले त्योहारी कीमतें बढ़ने की आशंका को लेकर खुदरा बाजार में चिंता बढ़ी है। उच्च मूल्य वाले UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाने के फैसले से रिटेलर्स और निर्माताओं के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है। सरकार की ओर से ग्राहकों पर यह शुल्क सीधे डालने की मनाही है, लेकिन उद्योग जगत के अनुसार कंपनियां बेस प्राइस बढ़ाने या त्योहारी छूट कम करने का विकल्प अपना सकती हैं।
त्योहारी कीमतें और UPI शुल्क का असर
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में खरीदारी के बिल 2,000 रुपये से ऊपर पहुंचते हैं। RAI के CEO कुमार राजगोपालन के अनुसार, ऐसे ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त लागत से ब्रांड्स और रिटेलर्स के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि निर्माताओं ने कीमत बढ़ाने या डिस्काउंट घटाने के संकेत देने शुरू कर दिए हैं।
त्योहारी कीमतें बढ़ने से कपड़ा उद्योग पर दबाव
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने त्योहारी सीजन से ठीक पहले MDR लागू होने पर चिंता जताई है। उद्योग पहले से मुद्रास्फीति और लॉजिस्टिक्स लागत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाओं का भी खुदरा कारोबार पर असर बताया जा रहा है।
त्योहारी कीमतें और छोटे कारोबारियों की चुनौती
व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार, 0.4% शुल्क छोटा दिख सकता है, लेकिन कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए इसकी लागत महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर छोटे रिटेलर्स के लिए लागत और अनुपालन का दबाव बढ़ने की चिंता है। ऐसे में त्योहारी कीमतें, छूट और ग्राहकों के बजट पर संभावित असर आने वाले खरीदारी सीजन में चर्चा का विषय बना हुआ है।
