NEET सुधार को लेकर नंदन नीलेकणि समिति की प्रस्तावित अंतरिम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

NEET सुधार को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर टास्क फोर्स ने व्यापक विचार-विमर्श किया है। समिति की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। समिति ने पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति के सदस्यों से भी चर्चा की है। इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में सुरक्षा, विश्वसनीयता और संस्थागत क्षमता से जुड़े सुधार सुझाना है।

NEET सुधार पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

18 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने समिति की प्रगति की जानकारी मांगी। कोर्ट ने DoPT के संयुक्त सचिव को अब तक उठाए गए कदमों का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि सुधार केवल रिपोर्ट तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू किया जाना जरूरी है। स्थायी व्यवस्था और नियमित स्टाफिंग को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

NEET सुधार में NTA का सिस्टम भी जांचेगा कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के नए और अपग्रेड किए गए कार्यालय का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को देखने की इच्छा जताई है। कोर्ट सिस्टम, बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन की स्थिति का जायजा लेना चाहता है। केंद्र ने बताया कि NTA की संरचना को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था तैयार की गई है, हालांकि मानव संसाधन से जुड़ी कुछ व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हुई हैं।

NEET सुधार में CBT को लेकर अभी फैसला बाकी

परीक्षा में तकनीक के अधिक इस्तेमाल और Computer-Based Test (CBT) की संभावित व्यवस्था पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार NEET का प्रारूप बदलने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। समिति की सिफारिशों और सरकार के आगामी निर्णय के बाद तस्वीर स्पष्ट होगी। परीक्षा सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, तकनीकी ढांचे और पारदर्शिता जैसे पहलू संभावित सुधारों का हिस्सा हो सकते हैं।