एल नीनो मानसून के बीच भारत में पॉजिटिव IOD और मानसून पर असर दर्शाता मौसम मानचित्रEl Nino and La Nina. Earth globe with continents and arrows that indicating the direction of warm and cold water and winds. Weather, Climate, oceanic and atmospheric phenomenon. vector illustration

भारत में एल नीनो के कारण मानसून संकट की चिंता बढ़ गई है। जापान की मौसम एजेंसी JAMSTEC ने एल नीनो की मौजूदगी की पुष्टि की है और इसे आने वाले महीनों में और भी मजबूत होने की संभावना है। एल नीनो अक्सर भारत में मानसून को प्रभावित कर कमजोर करता है और वर्षा में कमी उत्पन्न करता है।

एल नीनो मानसून संकट और बारिश का अनुमान

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जुलाई से Positive Indian Ocean Dipole (IOD) बनने की उम्मीद है। Positive IOD भारत की तरफ अधिक नमी लाने में सहायता करता है, जिससे एल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस वर्ष सामान्य से कम, लगभग 90 प्रतिशत वर्षा का अनुमान लगाया है।

एल नीनो से बढ़ी चिंता

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, एल नीनो सामान्यतः भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमज़ोर करता है। इस बीच, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल मानसून का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90 प्रतिशत कर दिया है। केरल में भी मानसून इस बार तीन दिन की देरी से पहुंचा, जिससे मौसम वैज्ञानिकों की चिंताएँ बढ़ गई हैं।

एल नीनो मानसून संकट का भारत पर असर

JAMSTEC के मॉडल के मुताबिक जुलाई से सितंबर के बीच भारत समेत विभिन्न देशों में सामान्य से अधिक गर्मी अनुभव की जा सकती है। जबकि उत्तर भारत में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी महीनों में मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा।


simran-singh-jan-naad-reporter

By Simran Singh

सिमरन सिंह जन नाद की सक्रिय संवाददाता हैं। ये नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक और स्थानीय खबरों को कवर करती हैं। रिपोर्टिंग के अलावा इन्हें बैडमिंटन खेलना और कुकिंग में विशेष रुचि है।