नोएडा, 26 सितम्बर 2026 | रिपोर्ट: अपेक्षा चौधरी
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्रों ने आयरनलंग मशीन नाम की श्वसन प्रशिक्षण प्रणाली विकसित की है। परीक्षित और प्रियरंजन द्वारा तैयार इस तकनीक को ट्रेड शो में पेश किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तर के प्रतिरोध के जरिए सांस लेने वाली मांसपेशियों को प्रशिक्षित करना है। मशीन में सेंसर लगाए गए हैं, जो प्रशिक्षण के दौरान उपयोगकर्ता के प्रदर्शन को रिकॉर्ड करते हैं। इससे व्यक्ति अपनी प्रगति को भी देख सकता है।
आयरनलंग मशीन में स्मार्ट स्क्रीन और सेंसर
इस प्रणाली में सांस लेने के अभ्यास के लिए विशेष माउथपीस और सेंसर दिए गए हैं। इसके साथ 20 इंच की स्मार्ट स्क्रीन लगी है, जिस पर प्रशिक्षण और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी दिखाई जाती है। इसमें अलग-अलग स्तर के ट्रेनिंग मोड और रियल टाइम परफॉर्मेंस ट्रैकिंग की सुविधा बताई गई है। उपयोगकर्ता के प्रदर्शन के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उपलब्ध रहता है। उपकरण प्रशिक्षण के दौरान सांस लेने की क्षमता और सहनशक्ति में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखता है।
आयरनलंग मशीन में दर्ज होती है उपयोगकर्ता की जानकारी
डेवलपर्स के अनुसार हर उपयोगकर्ता का एक अलग कार्ड बनाया जाता है। इसमें नाम, उम्र, लिंग और संबंधित परेशानी जैसी जानकारी दर्ज की जाती है। सेंसर के जरिए प्रशिक्षण का डेटा रिकॉर्ड होने से उपयोगकर्ता की प्रगति को समझने में मदद मिलती है। परीक्षित के मुताबिक, मशीन को विशेष रूप से श्वसन मांसपेशियों की ट्रेनिंग के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों में पिछले दो-तीन महीनों के दौरान फेफड़ों की क्षमता में सुधार देखने का दावा किया गया है।
आयरनलंग मशीन का उद्देश्य और उपयोग
डेवलपर्स का कहना है कि प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए श्वसन स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह तकनीक प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई है। हालांकि, मशीन से जुड़े सुधार के दावों को व्यापक चिकित्सकीय निष्कर्ष मानने से पहले वैज्ञानिक और क्लिनिकल मूल्यांकन जरूरी होगा। फिलहाल आयरनलंग मशीन को ट्रेड शो में प्रदर्शित कर तकनीक की विशेषताओं और संभावित उपयोग से लोगों को परिचित कराया जा रहा है।
