जेवर जमीन कीमत बढ़ने से किसानों पर असर और एयरपोर्ट क्षेत्र में बढ़ी जमीन की मांग

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के बाद जेवर जमीन कीमत में तेजी देखी गई है। इलाके में जमीन के दाम पहले के मुकाबले करीब तीन से पांच गुना तक बढ़ने की बात सामने आ रही है। एयरपोर्ट से जुड़ी औद्योगिक, आवासीय, व्यावसायिक और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के कारण जमीन की मांग बढ़ी है। इसका असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी।

जेवर जमीन कीमत बढ़ने से खेती की जमीन खरीदना मुश्किल

कई किसान मुआवजे की राशि मिलने के बाद दोबारा कृषि भूमि खरीदकर खेती जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, बढ़ी कीमतों के कारण पहले जितने रकबे की जमीन खरीदना मुश्किल हो गया है। आसपास की परियोजनाओं के लिए जमीन करीब 33 से 41 लाख रुपये प्रति बीघा में खरीदे जाने की बात कही जा रही है, जबकि कुछ जमीनों के लिए बाजार में सवा करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये प्रति बीघा तक की मांग बताई जा रही है।

जेवर जमीन कीमत का असर पड़ोसी जिलों पर भी

जेवर में जमीन महंगी होने के बाद कुछ किसानों ने बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा में कृषि भूमि तलाशनी शुरू की है। इन क्षेत्रों में भी कीमतें पहले की तुलना में बढ़ी हुई बताई जा रही हैं। अलीगढ़ और बुलंदशहर में कृषि भूमि के दाम करीब 15 से 25 लाख रुपये प्रति बीघा तक बताए जा रहे हैं, जबकि सड़क या आबादी के पास जमीन के लिए 30 से 50 लाख रुपये तक की मांग सामने आती है।

जेवर जमीन कीमत से किसानों के सामने नई चुनौती

अधिग्रहण से पहले खेती कई किसानों की नियमित आय का प्रमुख साधन थी। अब मुआवजे से उतनी ही कृषि भूमि दोबारा खरीदना कठिन होने के कारण कुछ किसानों के सामने खेती जारी रखने के बजाय दूसरे रोजगार तलाशने की स्थिति बन रही है। एयरपोर्ट से क्षेत्र में विकास और जमीन की मांग बढ़ी है, लेकिन किसानों के लिए दोबारा खेती योग्य जमीन जुटाना चुनौती बना हुआ है।