कोटा किशोरी मौत: एम्स दिल्ली में 15 वर्षीय तन्वी परियानी की मौत का मामला

राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय किशोरी तन्वी परियानी की एम्स दिल्ली में मौत के बाद सरकारी अस्पतालों में इलाज की प्रतीक्षा, जटिल मामलों के प्रबंधन और मरीजों के परिजनों से संवाद को लेकर सवाल उठे हैं। तन्वी जन्मजात हृदय दोष, VSD के साथ पल्मोनरी एट्रेशिया से पीड़ित थीं और करीब दो साल की उम्र से एम्स में इलाज के लिए जा रही थीं। 1 सितंबर 2026 को कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया।

कोटा किशोरी मौत पर पिता ने उठाए सवाल

तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने आरोप लगाया कि बेटी के इलाज और सर्जरी को लेकर परिवार को वर्षों तक तारीखें मिलती रहीं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। परिवार के मुताबिक, 2012 से 2026 तक उन्होंने कई बार दिल्ली और कोटा के बीच यात्रा की। पिता का कहना है कि अगर शुरुआती वर्षों में सर्जरी हो जाती तो बेटी को बचाया जा सकता था। उन्होंने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

कोटा किशोरी मौत पर एम्स का पक्ष

एम्स के अनुसार तन्वी की बीमारी की विस्तृत जांच 2013 में की गई थी। 2014 में एक सर्जरी की सिफारिश की गई थी, लेकिन बाद के आकलन में पाया गया कि फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख रक्त वाहिकाएं लगभग अनुपस्थित थीं। अस्पताल का कहना है कि जटिल हृदय संरचना के कारण सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं मानी गई और दवाओं के जरिए इलाज तथा नियमित फॉलोअप की सलाह दी गई।

कोटा किशोरी मौत की जांच शुरू

अगस्त 2026 में हालत बिगड़ने पर तन्वी को 24 अगस्त को एम्स में भर्ती किया गया था। अस्पताल के मुताबिक, हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का आकलन चल रहा था। 1 सितंबर तड़के उनकी ऑक्सीजन सैचुरेशन 48 प्रतिशत तक गिर गई और कार्डियक अरेस्ट हुआ। इलाज के प्रयासों के बावजूद सुबह 5:06 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मामले की विस्तृत जांच के लिए एम्स ने समिति गठित की है।