नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार पर DM मेधा रूपम का स्पष्टीकरण, 2020 की अधिसूचना का दिया हवाला
गौतमबुद्ध नगर में नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। डीएम मेधा रूपम के कार्यालय ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। कार्यालय ने 13 जनवरी 2020 की शासन अधिसूचना का हवाला दिया। अधिसूचना में पुलिस अधिकारियों को निर्धारित मजिस्ट्रेटीय शक्तियां देने का उल्लेख है। कमिश्नरेट व्यवस्था के तहत पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों की शक्तियां स्पष्ट की गई थीं। कई कानूनों को अधिसूचना की अनुसूची में शामिल बताया गया है। अब संबंधित मामले में लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर स्थिति देखी जाएगी।

नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार को लेकर डीएम मेधा रूपम के कार्यालय का स्पष्टीकरण

गौतमबुद्ध नगर में नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार को लेकर जिलाधिकारी मेधा रूपम के कार्यालय की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। डीएम कार्यालय ने 13 जनवरी 2020 की शासन अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया कि कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्धारित मजिस्ट्रेटीय शक्तियां प्रदान की गई थीं। यह स्पष्टीकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद सामने आया है।

नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार और कमिश्नरेट व्यवस्था

डीएम कार्यालय के अनुसार, कमिश्नरेट प्रणाली में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अधिकार पुलिस आयुक्त को दिए गए थे। अधिसूचना में तत्कालीन CrPC की धारा 20 के तहत पुलिस आयुक्त को कुछ मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां दिए जाने का उल्लेख है। धारा 21 के तहत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी निर्धारित प्रयोजनों के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई थीं।

नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार किन कानूनों में लागू

2020 की अधिसूचना की अनुसूची में उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, विष अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, पुलिस अधिनियम और अन्य कानून शामिल बताए गए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 भी शामिल है। हालांकि किसी विशेष मामले में अधिकार की वैधता संबंधित तथ्य, समय और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगी।

नोएडा मजिस्ट्रेटीय अधिकार पर आगे की नजर

डीएम कार्यालय का कहना है कि अधिकृत पुलिस अधिकारी निर्धारित कार्यपालक मजिस्ट्रेटीय शक्तियों का इस्तेमाल अपने स्तर पर कर सकते हैं। हर कार्रवाई के लिए फाइल का डीएम या अन्य राजस्व अधिकारियों के समक्ष जाना अनिवार्य नहीं बताया गया है। ऐसे में अब संबंधित मामले में हाईकोर्ट के आदेश, शासन अधिसूचना और कार्रवाई के समय लागू प्रावधानों को साथ देखकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।