नोएडा, 08 सितम्बर 2026 | रिपोर्ट: अपेक्षा चौधरी
नोएडा NSA मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छात्र नेता आकृति चौधरी की नजरबंदी रद्द कर दी है। मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी। कोर्ट ने कार्रवाई को लेकर प्रशासन के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए और संबंधित अधिकारियों के आचरण पर नाराजगी दर्ज की। कोर्ट ने आकृति चौधरी को ₹5 लाख मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
नोएडा NSA मामले में सबूतों की जांच पर सवाल
अदालत ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उपलब्ध रिकॉर्ड की गहराई से जांच जरूरी थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से ऐसा कोई व्हाट्सऐप संदेश या वीडियो पेश नहीं किया जा सका, जिससे हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने की बात साबित हो। कोर्ट ने इस आधार पर प्रशासन की कार्रवाई को उचित नहीं माना।
नोएडा NSA मामले में विरोध के अधिकार पर टिप्पणी
कोर्ट के अनुसार, मजदूरों के अधिकारों के समर्थन में शांतिपूर्ण एकजुटता की अपील को कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि NSA जैसे कड़े कानून का इस्तेमाल सामान्य आपराधिक कानून के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता। फैसले में पूर्वाग्रह और कयासों के आधार पर निवारक नजरबंदी करने पर भी सवाल उठाया गया।
नोएडा NSA मामले में अधिकारियों के आचरण पर टिप्पणी
अदालत ने संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कड़ी टिप्पणियां कीं और अधिकारियों के आचरण के संबंध में असंतोष सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया। मामले में अप्रैल 2026 के मजदूर आंदोलन के बाद आकृति चौधरी की गिरफ्तारी और 13 मई को NSA के तहत नजरबंदी का आदेश दिए जाने की बात सामने आई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर न्यायिक टिप्पणी दर्ज हो गई है।
