G7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक एकजुटता पर संबोधन देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस के एवियन में हुए आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए ‘भरोसे’ को सबसे महत्वपूर्ण तत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज के जुड़े हुए विश्व में देशों के बीच सहयोग और विश्वास वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

G7 शिखर सम्मेलन में मानवता-प्रथम दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत हमेशा मानवता-प्रथम के सिद्धांत पर कार्य करता रहा है। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को वैश्विक सहयोग की नींव बताया।

आपदाओं में भारत की सक्रिय भूमिका

प्रधानमंत्री ने बताया कि श्रीलंका में चक्रवात, अफगानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ और जमैका में तूफान जैसी आपदाओं के समय भारत ने सबसे पहले मदद देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल सहयोग ही नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी निभाना भी है।

संवाद और कूटनीति पर जोर

G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह प्रस्तावित किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दाता-ग्राही मॉडल से परे जाकर समान भागीदारी और एकता के आधार पर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान वैश्विक एकता की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और शांति व स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए।


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By Simran Singh

सिमरन सिंह जन नाद की सक्रिय संवाददाता हैं। ये नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक और स्थानीय खबरों को कवर करती हैं। रिपोर्टिंग के अलावा इन्हें बैडमिंटन खेलना और कुकिंग में विशेष रुचि है।