नोएडा, 26 जुलाई 2026 | रिपोर्ट: सिमरन सिंह
पेपर लीक बिल को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश करेगी। हालिया वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों के मद्देनजर सरकार ने मौजूदा कानून में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तावित किए हैं। इस संशोधन का लक्ष्य सार्वजनिक परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना बताया गया है।
पेपर लीक बिल में सजा और जुर्माना होगा दोगुना सख्त
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों को 5 से 10 वर्ष की जेल हो सकती है। वहीं, अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का सुझाव दिया गया है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं और सेवा प्रदाताओं के लिए नियम कड़े किए गए हैं। यदि कोई संस्था या उसके अधिकारी दोषी ठहराए जाते हैं, तो उन्हें 5 करोड़ रुपये तक का दंड, कम से कम 5 वर्ष की सजा और सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने पर 8 वर्ष तक का प्रतिबंध झेलना पड़ सकता है।
संगठित पेपर लीक पर होगी बड़ी कार्रवाई
पेपर लीक बिल में संगठित अपराध से संबंधित मामलों के लिए सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। इन मामलों में न्यूनतम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, गंभीर मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार को विशेष कार्य बल (STF) स्थापित करने का अधिकार दिया जाएगा। पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या STF को दो महीने के भीतर जांच समाप्त करनी होगी, ताकि मामलों का त्वरित समाधान हो सके।
हालिया विवादों के बाद आया संशोधन
यह संशोधन Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में बदलाव के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। हाल के पेपर लीक विवादों के चलते परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के मद्देनजर सरकार ने कानून को अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। यदि यह विधेयक संसद से स्वीकृत होता है, तो सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार हो जाएगा।
