नोएडा अस्पताल जांच में गंभीर कमियां, पुष्पा देवी की मौत पर उठे सवाल
नोएडा के सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में पुष्पा देवी की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने उपचार प्रक्रिया और CECT जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच समिति ने मेडिकल रिकॉर्ड में कई कमियां दर्ज की हैं। CECT की सहमति, testing dose और उपचार में देरी से जुड़े बिंदु रिपोर्ट में सामने आए। नर्सिंग नोट्स और अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि जांच समिति ने किसी डॉक्टर को सीधे मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। अब परिवार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।

नोएडा के सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में 52 वर्षीय पुष्पा देवी की मौत के मामले में परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के अनुसार उपचार के दौरान उनकी हालत में सुधार हो रहा था और डिस्चार्ज की तैयारी थी। इसके बाद CECT जांच कराए जाने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बाद में उन्हें यशोदा मेडिसिटी, गाजियाबाद ले जाया गया, जहां 16 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

नोएडा अस्पताल जांच में CECT प्रक्रिया पर सवाल

मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गौतमबुद्धनगर की ओर से समिति गठित की गई थी। 29 मई 2026 की जांच आख्या में उपचार और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदु दर्ज किए गए। समिति के अनुसार CECT Abdomen के लिए प्राथमिक चिकित्सक की सहमति का रिकॉर्ड नहीं मिला। मरीज को रेडियोलॉजी ले जाने की referred slip और testing dose से जुड़े प्रमाण भी उपलब्ध नहीं थे। CECT के बाद हालत बिगड़ने पर उपचार में विलंब प्रतीत होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।

नोएडा अस्पताल जांच में मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे

जांच समिति ने नर्सिंग नोट्स में sedation का उल्लेख मिलने की बात कही, लेकिन इसके लिए डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड नहीं पाया गया। समिति के अनुसार अस्पताल प्रशासन और treating physician की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और मांगे गए दस्तावेज भी अपूर्ण थे। हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी अंतिम चिकित्सीय निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा।

नोएडा अस्पताल जांच के बाद न्याय की मांग

पुष्पा देवी के बेटे मोहित शर्मा ने CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और नर्सिंग नोट्स सुरक्षित कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित डॉक्टरों, DMS और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ मुकदमा और लाइसेंस पर कार्रवाई की मांग भी उठाई है। अंतिम सच्चाई निष्पक्ष जांच और सभी मेडिकल रिकॉर्ड के वैज्ञानिक परीक्षण से ही सामने आ सकेगी।