नोएडा, 17 अप्रैल 2026 | रिपोर्ट: सिमरन सिंह
तेल बाजार गिरावट के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। बाजार में यह संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो सकता है और युद्धविराम की अवधि बढ़ सकती है। इसी उम्मीद ने निवेशकों के बीच राहत का माहौल बनाया है, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा है।
तेल बाजार गिरावट के पीछे वजह
हालांकि तेल बाजार गिरावट के बावजूद सप्लाई को लेकर चिंता खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति में बाधा बनी हुई है, जिससे करीब 13 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित होने का अनुमान है। ऐसे में फिजिकल मार्केट में कच्चे तेल की उपलब्धता कम होती जा रही है, जबकि फ्यूचर्स मार्केट में गिरावट जारी है।
तेल बाजार गिरावट के बावजूद सप्लाई चिंता
इस बीच अमेरिका के तेल निर्यात में तेजी दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी कच्चे तेल का निर्यात बढ़कर 5.23 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है। कुल तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे साफ है कि वैश्विक खरीदार अब मध्य पूर्व के बजाय वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं।
तेल बाजार गिरावट और अमेरिकी निर्यात
इस बीच अमेरिका के तेल निर्यात में तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार, निर्यात बढ़कर 5.23 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो हाल के समय का उच्च स्तर है। यह संकेत देता है कि वैश्विक खरीदार अब वैकल्पिक सप्लाई की ओर रुख कर रहे हैं।
ऊर्जा बाजार के साथ-साथ धातु बाजार पर भी असर पड़ा है। कॉपर की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोना स्थिर बना हुआ है। तेल बाजार गिरावट के बीच निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक आर्थिक संकेतों और भविष्य की मांग पर केंद्रित है।
