नोएडा डियर पार्क निर्माण कार्य के दौरान सेक्टर-91 बायोडायवर्सिटी पार्क का दृश्य

नोएडा के सेक्टर-91 में बायोडायवर्सिटी पार्क के अंदर बनने वाले नोएडा डियर पार्क को लेकर निवासियों की असंतोष बढ़ता जा रहा है। लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होने वाली इस परियोजना पर करीब 40 करोड़ रुपये का खर्चा होने की योजना है। निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद पार्क में धूल, मिट्टी और टूटे हुए रास्तों की समस्याएँ उत्पन्न होने लगी हैं, जिससे सुबह की सैर और स्वास्थ्य लाभ के लिए आने वालों को कठिनाई हो रही है।

नोएडा डियर पार्क पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय समुदाय के लोगों का मानना है कि बायोडायवर्सिटी पार्क का प्रमुख लक्ष्य हरे क्षेत्रों और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना है। इस संदर्भ में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य पार्क के प्राकृतिक रूप को प्रभावित कर सकता है। कुछ व्यक्तियों ने सांसद डॉ. महेश शर्मा ने पत्र के माध्यम से डियर पार्क को किसी अन्य स्थान पर विकसित करने का निवेदन किया है। उनका कहना है कि पार्क के इर्द-गिर्द की खाली जमीन का उपयोग एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

अफ्रीकी देशों से लाए जाएंगे हिरण

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, इस नोएडा डियर पार्क में भारत के कई शहरों के साथ-साथ अफ्रीकी देशों से भी हिरण लाए जाएंगे। परियोजना के तहत लगभग 10 प्रजातियों के हिरण सुरक्षित किए जाएंगे, जिनमें कुछ विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को सेंट्रल जू अथॉरिटी से मंजूरी मिल चुकी है और इसे वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से विकसित किया जा रहा है।

बायोडायवर्सिटी पार्क की पहचान बचाने की मांग

सेक्टर-91 का बायोडायवर्सिटी पार्क लगभग 110 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें सैकड़ों प्रजातियों के पौधे और जड़ी-बूटियां विद्यमान हैं। यहां प्राकृतिक पथ, गृह वाटिका और नक्षत्र शाला जैसी सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन यह प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता को हानि पहुंचाए बिना होना चाहिए।


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By Simran Singh

सिमरन सिंह जन नाद की सक्रिय संवाददाता हैं। ये नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक और स्थानीय खबरों को कवर करती हैं। रिपोर्टिंग के अलावा इन्हें बैडमिंटन खेलना और कुकिंग में विशेष रुचि है।