नोएडा दुष्प्रचार मामले में वायरल पुराने वीडियो और सोशल मीडिया जांच

नोएडा में दुष्प्रचार के संबंध में एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों और पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सोशल मीडिया पर चल रहे कई वीडियो पुरानी और भ्रांतिजनक हैं। इन वीडियो को हाल की घटनाओं से जोड़कर जनता में आक्रोश और भ्रम उत्पन्न करने का प्रयास किया गया है। पाकिस्तानी प्रचार माध्यमों पर माहौल बिगाड़ने की साजिश करने का आरोप लगाया गया है।

नोएडा दुष्प्रचार से अशांति फैलाने की कोशिश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ यूजर्स ने यह आरोप लगाया कि कथित “कॉकरोच जनता पार्टी” के सदस्यों के साथ मारपीट की गई। इसके माध्यम से पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाने की कोशिश की गई। पोस्ट्स में लोगों को भावनात्मक रूप से उत्तेजित करने वाले संदेश भी साझा किए गए ताकि सामाजिक तनाव में वृद्धि हो सके। शुरुआत के घंटों में ही इन पोस्ट्स को हजारों व्यू और सैकड़ों रीशेयर मिले।

नोएडा दुष्प्रचार में पुराने वीडियो का इस्तेमाल

जांच के परिणाम ने यह स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो किसी नई घटना से संबंधित नहीं थे। पुलिस के अनुसार, ये क्लिप्स वर्ष 2020 में हाथरस केस के दौरान हुए प्रदर्शनों से जुड़ी हैं। पुराने वीडियो को हाल के घटनाक्रम से जोड़कर प्रस्तुत करना एक संगठित प्रचार अभियान माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ अकाउंट्स लगातार समान पैटर्न में भ्रामक जानकारी पोस्ट कर रहे थे।

सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एजेंसियों की नजर

सुरक्षा एजेंसियां अब उन खातों की छानबीन कर रही हैं जो लगातार उत्तेजक सामग्री साझा कर रहे थे। कुछ खातों को प्लेटफॉर्म द्वारा भी बंद किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नकली वीडियो और गलत तथ्यों के माध्यम से लोगों की भावनाओं को भड़काकर सामाजिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही थी। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि किसी भी वीडियो या पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।


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By Simran Singh

सिमरन सिंह जन नाद की सक्रिय संवाददाता हैं। ये नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक और स्थानीय खबरों को कवर करती हैं। रिपोर्टिंग के अलावा इन्हें बैडमिंटन खेलना और कुकिंग में विशेष रुचि है।