नोएडा कचरा नियम के तहत चार श्रेणियों में कचरा छंटाई की जानकारी

नोएडा कचरा नियम के अंतर्गत नगर में नए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट 2026 नियम लागू हो गए हैं। इन नियमों का मुख्य मकसद ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को ज्यादा प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। अब घरों, संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों को स्रोत स्तर पर कचरे को चार विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करना अनिवार्य होगा।

नोएडा कचरा नियम में क्या बदलाव?

नए नियमों के तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, सेनेटरी वेस्ट और विशेष देखभाल वाले वेस्ट को अलग-अलग इकट्ठा करना आवश्यक होगा। जैविक अपशिष्ट, जैसे फल और सब्जियों के छिलके, गीले कचरे में रखे जाएंगे, जबकि कागज, प्लास्टिक और रीसाइक्लेबल सामग्री सूखे कचरे की श्रेणी में शामिल होगी। डायपर, सैनिटरी पैड, बल्ब, ट्यूबलाइट और समाप्ति तिथि वाली दवाओं के लिए अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

नोएडा कचरा नियम के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटर

नियमों के तहत 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवन, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल का उपयोग करने वाले संस्थान या 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले परिसर को बल्क वेस्ट जेनरेटर माना जाएगा। इसमें विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, सामुदायिक केंद्र और विवाह स्थल भी शामिल हैं।

नोएडा कचरा नियम से बढ़ेगी निगरानी

कचरा प्रबंधन प्रणाली को स्पष्ट और कुशल बनाने के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल भी स्थापित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने पर दंड और कार्रवाई का प्रावधान लागू किया जाएगा। इससे शहर में स्वच्छता और पर्यावरण की रक्षा को बढ़ावा मिलने की आशा है।


simran-singh-jan-naad-reporter

By Simran Singh

सिमरन सिंह जन नाद की सक्रिय संवाददाता हैं। ये नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सामाजिक और स्थानीय खबरों को कवर करती हैं। रिपोर्टिंग के अलावा इन्हें बैडमिंटन खेलना और कुकिंग में विशेष रुचि है।